

ABOUT THE BOOK
Ek Nausikhiya
किसी कहानी को रचने के लिए काल्पनिक गुणों की आवश्यकता पड़ती है, तभी सही मायनों में हम उसे एक कथात्मक आकार दे पाते हैं। लेकिन जब कहानी कल्पनाओं से परे किसी के जीवन और अनुभवों पर आधारित हो तब हमें इन गुणों को ढूँढने की आवश्यकता ज़रा भी नहीं होती। यथार्थ के रास्ते होकर गुज़री ये कहानियाँ अक्सर तिलिस्म, चटपटेपन और ख़्याली मोहब्बत से अलग ज़िन्दगी के वास्तविक मैदानी हक़ीक़त का बखान करती हैं।
‘एक नौसिखिया’ भी उन्हीं कहानियों में से एक है। जिसके भीतरी किस्सों और अनुभव का सामना हममें से अमूमन सभी ने किया होगा क्योंकि इस भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में संघर्ष करना हरेक के लिए अपरिहार्य है। बशर्ते इस दौड़ के परिणामस्वरूप इंसान या तो सफल हो जाता है अथवा असफल, निखर जाता है या बिखर। देखें तो, अधिकतर इसके नकारात्मक परिणाम ही हमारे सामने आते हैं और उस परिस्थिति में व्यक्ति नीरस एवं उदासीन होने लगता है तथा हार मान अपनी राह से विपरीत दिशा की ओर चल अपने उद्देश्य, अपने सपनों से हमेशा के लिए मुँह मोड़ लेता है।
इस पुस्तक का उद्देश्य केवल प्रेरक करना भर नहीं है बल्कि इसकी कहानी से समाज का हर नौसिखिया-‘एक नौसिखिया’ के अनुभवों को समझ हर परिस्थिति में पूर्ण दृढ़ता के साथ खड़े रहना और अपने उद्देश्य के प्रति डटा रहना सीख जाए। इसी उम्मीद तथा उद्देश्य के साथ इस किताब के पन्नों को रचा गया है।
मुझे उम्मीद है-किताब का हर अंश आपको कल और आज से जुड़ा हर वाकया ज़रूर स्मरण करवाएगा…
-प्रशांत अग्रवाल


इस पुस्तक का उद्देश्य केवल प्रेरक करना भर नहीं है बल्कि इसकी कहानी से समाज का हर नौसिखिया-‘एक नौसिखिया’ के अनुभवों को समझ हर परिस्थिति में पूर्ण दृढ़ता के साथ खड़े रहना और अपने उद्देश्य के प्रति डटा रहना सीख जाए। इसी उम्मीद तथा उद्देश्य के साथ इस किताब के पन्नों को रचा गया है।
मुझे उम्मीद है-किताब का हर अंश आपको कल और आज से जुड़ा हर वाकया ज़रूर स्मरण करवाएगा…
-प्रशांत अग्रवाल
Ek Nausikhiya – Series





